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हर ग़म को...

हर ग़म को ताक़ पर रखकर हम तो बेफिक्र हो गए थे, पीछे मुड़कर ही नहीं देखा, मुश्किलों के बादल घिरे थे, ख़्वाबों में भी नहीं सोचा था मुश्किलें इस कदर आएंगी, बस एक पल के तूफान में सब कुछ बहाकर ले जाएगी। मिली साहा

By मिली साहा
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