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हैवानियत...

हैवानियत कितनी बढ़ती जा रही है अपने ही अपनों का कत्ल कर रहे हैं मोहब्ब्त का हो रहा नामों निशान ख़त्म नफ़रत के फूल दिलों में खिल रहे हैं इंसानियत कमज़ोर पड़ रही हैवानियत सिर उठाए घूमता है उम्मीदों पर टिकी दुनिया की उम्मीद ही कत्लकर्ता हैं

By Mani Yaduvanshi
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