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“...
“ गोधन गज धन...
“ गोधन गज...
“
“ गोधन गज धन बाजि धन
और रतन धन खान।
जब आवे सन्तोष धन,
सब धन धूरि समान॥”
सन्तोष आने पर मन में शान्ति आती है। अन्यथा तृ्ष्णा से चैन नहीं मिलता।
”
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