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गीला मुझें...
“
गीला मुझें तुमसे नहीं रब से हैं,शिकायत मुझें तुमसे नहीं ख़ुदा से हैं,क्या ज़रूरत थी, तुम्हें इतना सुंदर बनाने की ऐ-ज़िक्र किया मैंने सुनों, क्यूँ बनाकर भेजा तुम्हें ख़ुदा ने यहाँ।
”
By
Hardik Mahajan Hardik
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