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एक शाम को...

एक शाम को जो उसके नाम कर दिया इस गुनाह पर गुमनाम को शहर ने बदनाम कर दिया नम आंखो ने मुस्कुरा कर कहा मुझे, अब और कुछ नही तूने मेरे साथ बदनाम होके मेरा काम कर दिया शर्माजी के शब्द

By प्रवीन शर्मा
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