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दुनिया की उलझनों...
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दुनिया की...
“
दुनिया की उलझनों से जब मन मेरा थक जाए, तो बचपन की दुनिया में लौटने को ये दिल चाहे, जहांँ कोई फिक्र नहीं बस है सुकून की ज़िन्दगी, खो जाए उसने ऐसा कि फिर लौटना ना चाहे।। मिली साहा
”
By
मिली साहा
69
बच्चा
बेचैनज़मीरसुकून
बचपनकीकहानी
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