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*धूप* विरह की...
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*धूप* विरह...
“
*धूप* विरह की ठिठुरन से जम-सी गई हैं यादें आजकल..... मन मेरा ख्वाहिशों के चिलमन तले तेरे दीदार की "धूप" निकलने की इंतजार कर रहा है।। - तेजस्विनी कुमारी
”
By
Tejaswini Kumari
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धूप
धूप कोट्स
धूप कोट्स इन हिंदी
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Tejaswini Kumari
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