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धरती आज कर...

“ धरती आज कर रही पुकार, इंसानों मत करो मेरा संहार, तुम मुझे पहुंचा कर क्षति, स्वयं अपने भविष्य पर कर रहे हो वार।। मिली साहा ”

By मिली साहा
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