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ढलते सूरज के...
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ढलते सूरज...
“
ढलते सूरज के साथ, ना जाने क्या हो जाता है.. अल्फाज़ों में अलग ही जान आ जाती है, साथ तुम्हारी याद, और मेरी कलम.. खुद - ब - खुद थिरकने लग जाती है.......
”
By
Adarsh Kumar Jha
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Adarsh Kumar Jha
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