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चल ए दिल...

चल ए दिल कहीं मुस्कान ढ़ूडते हैं .. तेरे लिए मुक्कमल धड़कन और मेरे लिए थोड़ी सुकून ढ़ूड़ते हैं, थक गए इन दुनियादारी से .. चल चलते हैं दूर कहीं .. अपनी हँसी अपनी अपनी मुक़ाम ढ़ूड़ते हैं..

By PrajnaParamita Aparajita
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