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बात कड़वी...

बात कड़वी है मगर सच्ची है उधार दीजिए मगर सोच समझकर, अपने ही पैसे भिखारी बनकर मांगने पड़ते हैं, और अगला सेठ बनकर तारीख पर तारीख ही रहता है।

By Keshav Bansal
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