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अपनों से...

अपनों से बिछड़कर तो जन्नत भी नही चाहिए, तो भला ये सारे जहाँ की खुशियाँ किस काम की... या रब्बा तुज़से कोई मन्नत भी नही चाहिए, अपनों से दूर कोई दुआ भी किस काम की... - परमार रोहिणी " राही "

By Rohini " Raahi " Parmar
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