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अपने ही...

अपने ही अपनों से लड़ जाते हैं, पैसों की खातिर दूर हो जाते हैं, पैसों में ही तोलते हैं खुशियों को, विश्वास की भी कद्र नहीं करते हैं। मिली साहा

By मिली साहा
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