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अगर किताब...

अगर किताब बोलती📚📖 .........................वो कहती… “मैंने वर्षों तक इंतज़ार किया है। तुम्हारे छूने की, तुम्हारे पलटने की, तुम्हारे समझने की। मैं केवल काग़ज़ और स्याही नहीं हूँ, मैं वो ख़ामोश हमराज़ हूँ, जो तुम्हारे अकेलेपन में साथ निभाती हूँ।”

By MULLA ADAM ALI
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