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आंखों से...

आंखों से सपनों तक का सफ़र तुम तय न कर पाए, होंठों से मुस्कुराहट तक का तुम्हारी जिक्र पहुंच न पाए, दिल से इश्क तक तेरी यादें भी रूख न कर पाई, दुनिया का पहरा था, या तेरी बेरुखी... तु मुझमें और मैं तुझमें चाह कर भी समा‌ न पाई।

By SIJI GOPAL
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