@mahendra-singh-katariya

MAHENDRA SINGH KATARIYA
Literary Captain
29
Posts
1
Followers
0
Following

None

Share with friends
Earned badges
See all

हरीतिमा के रूप यौवन में, देखो आया नव निखार। बाग-बगीचों में जो फैलीं, बहुरंगी पुष्पों की बहार।

जाकर लौट सकता न कोई, अनदेखी उस दुनिया से। किरदार निभा चलें कोई, जगत की नाट्यशाला से।

आहट पा मधुमास की, यह उन्मुक्त मन हर्षाना। सुन भ्रमर की गुंजन से, लगता बसंत नव आया।


Feed

Library

Write

Notification
Profile