स्त्री पीड़ा मर्म और प्रेम
Share with friends
तू जो आया एकदम से सवेरा कर गया मेरी बुझी वीरान जिंदगी को बसेरा कर गया पहले तो खुद के नसीब पे यकीन ना कर सकी पर जब तूने छूकर आलिंगन मे भरा मुझे तब मेरे प्यार पे यकीन गहरा कर गया