कथा, कविता, कोट्स, लेख इत्यादी साहित्य लिखाण
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गलती से हि सही, कभी तुम भी याद किया करो हमे l भरी मैफिल में हिचकी देके, शर्म से आँखें झुकानी है हमे ll
तुम् जानते ही क्या हो महोब्बत के बारे में । कभी मेरी तन्हाई में आ के देख लेना वहाँ सारा मंजर तेरे नाम से साँसों लेता हैं।।