मेरे ख़्वाब जो आँखों से जलाए तुमने,
अब उन राखों से झांकती लौ जलाती तो नहीं है तुमको ???
Hera Faiyaz "Sahir" ✍️
हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है ठीक उसी समय जब तुम मुझे स्वयं से दूर धकेल रहे हों उसी क्षण तुम भी मुझसे दूर रहे हो ।
Hera Faiyaz "Sahir" ✍️