Lata Sharma (सखी)
Literary Colonel
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लिखती हूँ क्योंकि जीती हूँ, जीती हूँ क्योंकि मैं लिखती हूँ। लिखना जीवन है, जीवन लिखना है😊

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जिंदगी भी कभी कभी अजीब पशोपेश में डाल देती है, जहां से उम्मीद और अंत दोनों करीब दिखाई देते हैं।

हजारों बार मरी हूँ मैं खुद के सामने, चलो अच्छा है! लोगों के सामने एक बार मरी होती तो वो जला देते। ©सखी

सोचूँ न सोचूँ में तुमको दिल में तुम होते हो, सामने कोई हो न हो निगाहों में तुम होते हो, कहती है सारी दुनिया सुबह कान्हा के नाम लो, वो क्या जाने कान्हा की मूरत में तुम होते हो। ©सखी

जबसे देखा तुमको मैं तुम्हारी हो गई, यूँ लगा दिल को इश्क़ बीमारी हो गई, दिखने लगे तुम सबको मेरी आँखों में, तेरे चारों तरफ दुनिया हमारी हो गई। ©सखी

मन के पैर नहीं होते, तभी वो चल नहीं पाता, मन के पंख तो होते हैं, मगर कट जाते हैं, कोई कहे मन की कोई बात पूरी नहीं होती, कैसे हो मन के पास कहने को जुबां नहीं होती। @सखी

अब्र की तलाश में भटकता रहा है पागल दिल, जबकि किस्मत में बस प्यास लिखी है इसके लिए। सखी

धोखा ही देना था गर हमें तो कह देते, हम पलकें बिछा देते। तुमसे मुहब्बत इतनी अधिक है कि खंजर भी बस कांटे सा चुभता। ©सखी

चाह कर उसे हैं सचमुच गलती कर बैठे, हम पसन्द करें वो इस काबिल भी न था। ©सखी

चापलूसी एक ऐसा रोग है जो जिसे लगता है सब बर्बाद कर देता है, इसलिए न चाप्लूसी कीजिये न ही पसन्द कीजिये। तारीफ करने वाले बहुत मिलेंगे, मगर परवाह करने वाला लाखों में एक होता है। कोई ऐसा मिले तो सम्भाल कर रखिये प्यार परवाह और वक़्त देकर.. क्यों कि ये खोया तो यकीन कीजिये ऐसा कोई न मिलेगा जो आपको दिल से चाहे। ©सखी


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