Integrated M.Sc.
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किसी लेखक के लिए जरूरी है "अपनी आत्मानुभूति व्यक्त करना" पर इससे कहीं ज्यादा जरूरी है किसी लेखक के लिए "अपने मन की आंतरिक इच्छाओं को जागृत करना सुसुप्तावस्था से"। ©योगेश्वर स्वामी
"शीर्षक:- बचपन" बचपन तो उसी दिन मृत्यु रूपी अवसाद के तिमिर में कहीं खो गया था !!!!! जब जिम्मेदारियों ने बचपन की दहलीज पर अपना पहला कदम रखा था ठीक उस अल्पविराम की तरह, जो प्रतीक है ठहराव के साथ निरंतरता का © योगेश्वर स्वामी