मां हूं तभी जिंदा हूं । दिल्ली से हूं और कविता कहानियां कह लिया करती हूं , मन को पन्नों पर उडेल लिया करती हूं
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जब तक दीवानेपन में होते हो शब्द आंखों से मोती बरसाते हैं जब आप जिंदा हो रहे होते हो शब्द जादू बन कलम से बरसते हैं ज्योति धनखड़ ❤️