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हर एक उम्मीद पर उम्मीदवारी सदैव पुरुष की होती है वह बढ़ चढ़कर अपना हिस्सा मुकर्रर करता है जीता है जागता है और अपने पुरुषार्थ के बल पर सत्ताविहीन नारी को अपने आगोश में जकड़ता है।।।
किसी के प्रति आकर्षण इतना भी न हो कि *उसके दोष ही न देख पाएँ *और.......* नफरत भी इतनी न करें कि उसके गुण भी न देख पाएँ......।।