Introduction Name - Preeti Sharma " Aseem" (Poet/ Writer) *Published Works-(5) *Single Poetry Collections - 1. Zindagi Ke Rang (Poetry Collection) 2. Prerna 3.Bikharte Rang 4.Sapta Sindhu Bharat 5.Kuch Kisse Kuch Hisse (Story Collection) 6.My life My Quotes *Joint Poetry Collections... Read more
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कुछ लोग लोगों को बस बेवकूफ ही बनाते रहे। और कुछ इन्सानियत की खातिर बेवकूफ बन कर भी इन्सानियत का साथ निभाते रहे।
फितरत कुछ लोग अजब सी लाये थे। ऊपर से चेहरों पर चेहरे भी अनगिनत पाये थे। मतलब के लिए जुबाने शहद -सी करके इन्सानियत को जह़र दे आये थे।
कितना समझाया....... वो नादान नासमझ निकला। मैं ...... जिंदगी की बात करता रहा। वो..... मौत की तरफ भाग निकला।
तलाश करों... मंजिलें। न जिंदगी को मौत -सा बसर कर। तंग झरोखों से आसमान नापना छोड़ दें। तू अंतरिक्ष के सफर से गुजर कर।
जिंदगी की उठक -पटक कर रहा हूँ। सोच को कभी इस कोने में...... कभी उस कोने में रख रहा हूँ। बैठता हूँ.... तो देखता हूँ..... तो फिर कुछ... जचता ही ....नहीं। पता नहीं..... मैं यह क्यों कर रहा हूँ।
तलाश करों... मंजिलें। न जिंदगी को मौत -सा बसर कर। तंग झरोखों से आसमान नापना छोड़ दें। तू अंतरिक्ष के सफर से गुजर कर।
जिंदगी की उठक -पटक कर रहा हूँ। सोच को कभी इस कोने में...... कभी उस कोने में रख रहा हूँ। बैठता हूँ.... तो देखता हूँ..... तो फिर कुछ... जचता ही ....नहीं। पता नहीं..... मैं यह क्यों कर रहा हूँ।