Madhurima chandra
Literary Lieutenant
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अनुभूतियों के स्पर्श से जिन शब्दों का मन में प्रस्फुटन होता है उन्हें लेखनी की लय में प्रवाह कर देती हूं ..बस !!

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आओ सब मिल कर बात करें मुलाकातें बार-बार करें कभी सोचा है कि कितने तन्हा हैं हम सब यूँ तो कहने को जुड़े हैं पूरी दुनिया से हम पर साथ बैठ के दो घडी गपशप भी नही करते अब वो चाय की चुस्कियाँ .. वो पकौड़ों की महक को चलो फिर से आबाद करें आओ सब मिल कर बात करें

अपनी अंतर्यात्रा के साक्षी बने और देखें.. कहाँ से कहाँ पहुँचे आप याद कीजिए अपना वो डरा सहमा दबा दबा सा रहने वाला रूप और..आज देखिए आत्मविश्वास और स्वाभिमान से दीप्त आपका ओजस्वी व्यक्तित्व निःसंदेह.. आपकी अंतर्यात्रा के सोपान और आयाम अतुलनीय है


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