(शायर,कवि व गीतकार) अलवर राजस्थान ये जो दिल का रिश्ता है ना, बडा अजीब होता है जितना दूर होता है नजरों से, 'देव' रूह के उतना ही करीब होता है
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वो जख्म पर जख्म देते गये---'देव' उन्हे लगा हम रो देंगे --! पर हमने भी मुस्कराकर कहा__बस! इतने ही? ईतनी जल्दी हार गये ----! ! आजकल सबसे पूछते फिर रहे हैं। किस मिट्टी का बना है ये?
क्यों हर किसी को,इस जमाने पर ऐतबार नहीं होता इश्क तो इबादत है खुदा की, ये बार-बार नहीं होता लगता है इस बेदर्द जहाँ ने, कैद कर लिया एक और मजलूम को इसिलिए,'देव'अब उनका, दीदार नहीं होता