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पानी में रहकर भी तैरना न सीखा, मैंने ख़राब हाल में भी अपना वजूद सँभालकर रखा।
चेहरे पर मुखौटे की क़ीमत तब समझ आई, जब रोना ज़रूरी था और मुस्कराना मजबूरी।