Nihal singh Singh

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“दुनिया की रिवायत से ख़ुद को अलग बहने दो, चाँद को पाना है तो कालिख मुँह पर रहने दो।”

ःःःःःःःःःःः

मानवता पशुता में बदल जाती है, जब आस्था अंधविश्वास हो जाती है।

"हद से ज्यादा किसी को दिल से मत लगाओ। पास की चीज़ों से थोड़ी दूरी हमेशा बनाए रखो।"

पानी में रहकर भी तैरना न सीखा, मैंने ख़राब हाल में भी अपना वजूद सँभालकर रखा।

चेहरे पर मुखौटे की क़ीमत तब समझ आई, जब रोना ज़रूरी था और मुस्कराना मजबूरी।


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