अनजान हम भी वहाँ पहुच गए
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क्या है बुझने के पहले की छटपटाहट?? किसी के चढ़ाने से वो चढ़ा नही। समझता था अपनी कमजोरियों को। सीमाओं में बंध जीता चल। कहीं पहुचने की कोई तमन्ना नही।