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बचपन में साथ -साथ खेले साथ- साथ बढ़े हुए भाई -बहन आज अनजान हुए सबके अब अपने मकान हुए और सब हुए एक दूजे के मेहमान हुए मिनाक्षी प्रकाश
सर ,सर सर ... "जब दिमाग में ना हो किसी बात का असर तो कहिए ,,,,, सर , सर , सर ... जब हो सर पर बेवजह प्रेशर तो कहिए .. सर, सर, सर.. " मिनाक्षी प्रकाश
भक्ति दिलाने वाला भी -भोला भक्ति करने वाला भी -भोला ध्यान करने और कराने वाला भी- भोला मिनाक्षी प्रकाश
भक्ति दिलाने वाला भी -भोला भक्ति करने वाला भी -भोला ध्यान करने और कराने वाला भी- भोला मिनाक्षी प्रकाश
"तेरे दर पर पहूँच कर बड़ा सुकून आता है चंचल मन की रफ्तार कम होती है और ये मन, मन ही मन मुसकुराता है ऐसा लगता है मुझे कि शायद अपनी ही नादानियों पर ये स्वयं पर ही झलाता है " मिनाक्षी प्रकाश
"यूं ही चलते रहे हम जीवन के रास्तों में और कारवां गुजरता रहा अपनी ही धुन में थे हम और नजारा भी धुंधला हुआ " मिनाक्षी प्रकाश
कही मैंने पढ़ था, कि, खास क्या है ? जरूरत या जरूरी किसी की जरूरत बनने से अच्छा है कि आप किसी के लिए जरूरी हो " स्वार्थ की दुनिया में सभी अपने-अपने जरूरत से जुड़े हुए है लेकिन जो आपका अपना होगा उसके लिए आप सबसे जरूरी होंगे " मिनाक्षी प्रकाश