आज जिद्द पर अड़ी हूँ मैं, हाँ...आज अपने लिए खड़ी हूँ मैं
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कोई तो पाठशाला ऐसी होती जहाँ चेहरा पढ़ना सिखाते उम्र सिर्फ लोगों को समझने में ही बीती जा रही है रेनू पोद्दार
तेरा अंत जब आयेगा बता कर नहीं आयेगा जोड़ा हुआ कुछ साथ नहीं जायेगा कर्मों का लेखा-जोखा ही बस साथ तू ले जायेगा