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“बहुत अधिक है मेरे संग अत्याचार हुआ, सुकून से मेरा जीना अब दुश्वार हुआ । “बहुत अधिक है मेरे संग अत्याचार हुआ, सुकून से मेरा जीना अब दुश्वार हुआ ।
लफ़्ज़ों की तलाश में लफ़्ज़ों का ही दर खटखटाता हूँ, लफ़्ज़ों की तलाश में लफ़्ज़ों का ही दर खटखटाता हूँ,
इन सामाजिक बोझों के जो आया तू अधीन , अस्तित्व खुद का लिया तूने खुद से ही छीन। इन सामाजिक बोझों के जो आया तू अधीन , अस्तित्व खुद का लिया तूने खुद से ही छीन।
'जब अपनी कड़वी ज़ुबा से मानव जाति को तुम भड़काते हो, भाईयों को अपने भाईयों से ही लड़वाते हो।' सोचने ... 'जब अपनी कड़वी ज़ुबा से मानव जाति को तुम भड़काते हो, भाईयों को अपने भाईयों से ही...