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Kanchan Jharkhande
Literary Colonel

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सभ्य, साधारण, शब्दों में गहराई है, कोई पूछे कि मेरा अनुभव कितना है, मैं कहती हूँ की, अभी तो जिंदगी की शुरूआत की है। कंचन झारखण्डे

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Submitted on 03 Mar, 2020 at 09:20 AM

इंटरनेट के जमाने में बच्चा-बच्चा बिक रहा है। दुर्दशा की मिसाल क्या दूँ छटी कक्षा में इश्क दिख रहा है। Kanchan Jharkhande

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:51 AM

तुझे भूलना मेरी अनवरत में नहीं, तौबा ख़यालों की अफरा-तफरी से तुम्हें अक़ीदा रखते हैं। स्वर्णा-कंचन

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:50 AM

उनके तेवर में नफरत के फ़साने देखे हमने वर्षो बाद दोस्तो के बदलते मयखाने देखे

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:49 AM

अभी तो समुंदर की सतह तलक हूँ। हौसला रखती हूँ, गहराई की मृदा नापने का।

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:47 AM

मासूम सी एक शक़्ल थी भली भली उसकी दोस्ती उसकी याद अब रात दिन नही हाँ, मगर हर कभी। कंचन

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:45 AM

दो शब्दों के मध्य का मौन हूँ मैं, फिर मत पूछना की कौन हूँ मैं कंचन

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:44 AM

जिंदगी में यारों गम न करो जरा जरा सी बातों पर आँखे नम न करो, गर कोई तुमसे रहने जो लगे दूर दूर समझ लेना, कोई है तुमसे बेहतर

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:42 AM

हम उन्हें देख कुछ इस क़दर मुस्कुराये थे कि मुझे संभालने महफ़िल के सब लोग उठ आये थे।

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:40 AM

अब की बार जब आना थोड़ा सा वक़्त साथ लाना, कुदरत का दिया सबकुछ है सिवाय तुम्हारा साथ

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:39 AM

ख्वाबों के फूल हक़ीक़क में नही खिला करते इश्क़ के पत्ते हर चमन में नही खिला करते कोई पूँछे हमसे की इश्क़ की गहराई क्या है, हम भी कह देते हैं, की मोती की चमक हीरा से नही पूछा करते

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:38 AM

लेख पर लेख के दरमियां उनसे शब्दबाज़ी कर आये हम गये थे शब्दों पर पूर्ण विराम लगाने वहाँ एक और शब्दबाज़ी कर आये हम

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:35 AM

चलो माना, मैं जो मर जाऊँ भरी जवानी में... फिर क्या बचेगा उसकी कहानी में... Kanchan Jharkhande

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:34 AM

आँखों से अश्क़ बहे उसकी कोई गुफ़्तगू करो एक जमाना गुज़र गया मुझें ख़ुद में समुंदर समेटे हुऐ। कंचन

Submitted on 07 Feb, 2020 at 06:32 AM

सभ्य, साधारण, शब्दों में गहराई है, कोई पूछे कि मेरा अनुभव कितना है, मैं कहती हूँ की, अभी तो जिंदगी की शुरूआत की है। कंचन झारखण्डे


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