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फिर वहीं पुराने पन्ने पर लिखा ख्वाब पढ़ रहा था, ऊपर खुदा भी एक- एक दिन का हिसाब कर रहा था। सपने सपने ही रह गए, तमन्ना को वक़्त बहा ले गया, आंखे खुली बंद होने के समय, एक पल भी ज्यादा मिल न सका। - - Shekhar shivam