ସ୍ମୃତି ପ୍ରଜ୍ଞା କାନୁନଗୋ
Literary Lieutenant
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ପୋଷ୍ଟସ୍
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ଅନୁସରଣକାରୀ
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ଅନୁସରଣ କରୁଛନ୍ତି

Surviving a mediocre life with poems, ghazals,chai and sunsets ✨

ବନ୍ଧୁମାନଙ୍କ ସହ ବାଣ୍ଟନ୍ତୁ
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इतनी भी क्या जरूरत थी रोशनी की के खुद के दिल को आग लगाये बैठ गये....

जब तुम्हे पता चल जाए कि तुमने अपना काम कर दिया है, सही तरीके से अपना किरदार निभा लिया है तब मुकर जाना चाहिए... ज्यादा किरदार को घसीटना मतलब जो काम सही से हो चुका है उसे और खराब करना... ये वास्तविक में हर चीज़ में लागू होता है....

मजहब की बातें करते हो... जरा इश्क़ का मजहब बताना!!

चंद लम्हों के प्यार के लिए हमे शिकायत ताउम्र रही, कुछ बदला जरूर है हमारे दरमियाँ फिर भी प्यार बेशुमार रही।


ଫିଡ଼୍

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