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न मैं हिंदू न मैं मुस्लिम मैं अदना-सा एक इंसान मित्र प्रेम भाव को ह्रदय रखता, काम से रखना अपना काम।। जात-पात न मेरी पूछो उससे मुझको है क्या काम ज्ञान विज्ञान से सीखता जाता, कुछ अनुभव भी देता मुझको ज्ञान।। कर्मठ हूं मैं कर्म ही करता परिणाम न होता मेरे हाथ जो मिल जाता रख लेता हूं, मैं परिवार का रखता अपने ध्यान।।