कुछ नहीं बस एक सफर में खो गया हूँ, आगे है रोशनी दिख रही लगता है पहुच गया हूँ।
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मां तुम्हारा न होना हमें हमेशा रुलाता है पहले पूछती थी कुछ देर में ही खाओगे कुछ अब घण्टों भूखा रह जाता हूँ।
अगर कोई खुद को क्षण भर संतुलन में नहीं रख सकता,तो उसे कभी जीवन में विशेष करने पर विचार नहीं करना चाहिए। विवेकादित्य