ईश्वर की अपार सृष्टि में, मैं स्वयं को, एक अदना जीव समझते हुए कोशिश करती हूँ एक संवेदनशील इंसान , एक जागरूक नागरिक और एक सहृदय साथी बनूँ I
Share with friendsरुख हवाओं का मोड़ने की ज़िद क्यों करें हो के हवाओं पे सवार अब अपना सफ़र है तूफ़ान के वेग को पालों में भर के बढ़ चलो सट के नहीं बल्कि डट के रहने में असर है