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बदलने का मौसम क्या आया हर सूरत बदलने लगी; जो कभी आंखों से पढ़ लेते थे खामोशियां तो कभी उदासियां, आज उन्हें भी लफ्ज़ ए बयां की जरूरत पड़ने लगी । ।