@amit-singhal-aseemit

Amit Singhal "Aseemit"
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मैं कवि, लेखक और विचारक हूँ। मैं अपनी रचनाओं के लिए कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुका हूँ। मेरी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। मेरी रचना साझा संकलन "शब्द दीप" में सम्मिलित है, जिसने "इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स" में अपना स्थान बनाया है।

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मेरी शायरी में अब उसका ज़िक्र भी नहीं, फिर भी हर लफ़्ज़ में उसी की सदा लगती है। दिल को अब उसकी कोई फ़िक्र भी नहीं, फिर भी इस हवा में उसी की अदा लगती है।

पहचान न पाया जिसे, वही था आस्तीन का साँप, जिसे मैंने अपना समझा, वही चुपके से डस गया। देता रहा मुझको हर मोड़ पर सिर्फ़ दुःख और ताप, छल का वह ताना-बाना मेरे ही सीने में कस गया।

देखकर उनको दिल में हैरत-ए-आशिक़ी जगी, एक पल में ही दुनिया सारी हसीन लगने लगी। उनकी निग़ाहों से चाहत की अजब आग लगी, हर धड़कन में वफ़ा की नई तरन्नुम जगने लगी।

अचानक बिना कुछ कहे ही वो यूँ चला गया, मेरी आँखों में सिर्फ़ यादों का साया रह गया। मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरा दिल छला गया, मेरे ज़ेहन में सिर्फ़ ख़ामोश सवाल कह गया।

सच्चाई की रास्ते में अपना हक़ माँगते हैं, हर मुश्किल हालात से लड़ना जानते हैं। हम इंसाफ़ और सच का सबक़ माँगते हैं, हम तो सिर्फ़ रब को ही अपना मानते हैं।

बिखरा हुआ दिल का हर एक रेज़ा कह रहा, दर्द की आँधी में भी उम्मीद की शमा जली है। आँखों से आँसुओं का एक दरिया बह रहा, मगर हौसलों की राह में खिली नई कली है।

आप की मुहब्बत में सच्ची रहनुमाई मिलती है, हर क़दम पर ज़िन्दगी को एक सहारा मिलता है। आपकी बातों से मन को एक गहराई मिलती है, डगमगाती नाव को भी अब किनारा मिलता है।

सच्चे गुणों से ही सदा मुख पर शोभ आती है, दिलों को जीतने की अनोखी कला मिलती है। जहाँ पवित्र मन हो, वहाँ सुंदरता भी आती है, मन में आत्मविश्वास की नई कली खिलती है।

दिखाई जब से तुमने यह अजब करामात, हर तरफ़ चर्चा तुम्हारा ही होने लगा। बदल गई है एक पल में ही मेरी सारी बात, मेरा मन तुम्हारी चाहत में खोने लगा।


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