@amit-singhal-aseemit

Amit Singhal "Aseemit"
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मैं कवि, लेखक और विचारक हूँ। मैं अपनी रचनाओं के लिए कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुका हूँ। मेरी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। मेरी रचना साझा संकलन "शब्द दीप" में सम्मिलित है, जिसने "इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स" में अपना स्थान बनाया है।

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ज़ीस्त सागर में कश्ती है जिसकी पतवार है हमारे हाथ, आते हैं तूफ़ान लेकिन इनसे गुज़रना है हिम्मत के साथ। अगर छूट गई पतवार हाथ से, तो क़िस्मत ख़राब हो जायेगी, पकड़े रहे मज़बूती से, तो ज़ीस्त में खुशी की बारिश हो पायेगी।

श्रावण की पहली बारिश की रिमझिम बूँदें, दूषित धरती को अपने पवित्र जल से धोती हैं। जब देखो पहली बारिश की बूँदों को पुष्पों पर, प्रतीत हो कि जैसे किसी माला के सच्चे मोती हैं।

जहाँ "मैं" एवं "तुम" का कोई भेद नहीं होता, वहाँ "मेरे" सुख से "तुम" को खेद नहीं होता। जहाँ 'मैं" और "तुम" का अन्तर सम्पन्न हुआ, वहाँ "अद्वैत" का उचित स्वरूप उत्पन्न हुआ।

मेरे नाम रूमानी ख़त जब तुम लिखती हो, ख़तो के अल्फ़ाज़ों में तुम ही दिखती हो। तुम्हारे ख़तों में तुम्हारे सवाल जज़्बात हैं, फिर मेरे दिल से आए जवाब की बात हैं।

अपने मन पर नियंत्रण कर भी लेता इंसान, लेकिन पेट की पुकार करवाती है उस से पाप। जब वह देखता कि भूख से तड़प रही संतान, ग़लत काम करने को मजबूर होता बेचारा बाप।

प्रेम की डोर से बंध जाता प्रेम का बंधन, इसमें रक्त्त के सम्बन्ध का कोई महत्व नहीं है। आपसी स्नेह से सुगंधित होता है यह चंदन, बिना किसी अपेक्षा के विश्वास होता यहीं है।

घर से बाहर होने पर इससे मिलता सुरक्षा का भाव, लोगों से रिश्ता निभाओ अगर है समय का अभाव। ख़ाली समय में इस पर देखो फ़िल्में या सुनो संगीत, ज़िन्दगी के हर क़दम पर बनता मोबाइल मेरा मीत।

जब किसी सरकारी अधिकारी या मंत्री को, होता कुर्सी से इश्क़ और समझे कुर्सी को मुश्क़। तब आम जनता के दुख और तक़लीफ़ को, जानने समझने की उसकी इच्छा हो जाती शुष्क।

आजकल कुछ लोगों को रहता एक ही काम, इसकी बातें उस से करना, लेकर हमारा नाम। दूसरों की बुराई हम से करते, बनकर हमारे, फिर उनके सामने जताते, वे हैं उनके प्यारे।


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