@amit-singhal-aseemit

Amit Singhal "Aseemit"
Literary General
1744
Posts
1
Followers
0
Following

मैं कवि, लेखक और विचारक हूँ। मैं अपनी रचनाओं के लिए कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुका हूँ। मेरी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। मेरी रचना साझा संकलन "शब्द दीप" में सम्मिलित है, जिसने "इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स" में अपना स्थान बनाया है।

Share with friends
Earned badges
See all

तुम मेरे दिल से खेलकर चले गए और इससे निकली आह, मग़र तुम अपने खेल से खुश होकर बोलते हो वाह जी वाह। शर्म आती है कि मैंने कभी तुम्हें अपना सब कुछ माना था, तुम्हें तो मेरे दिल को टूटे खिलौने की तरह भूल ही जाना था।

उसे मालूम था मुझे उससे बेशुमार प्यार था, फिर भी उसने मेरे कलेजे पर किया वार था। सब मालूम होकर भी वह बेवफ़ाई कर गई, या शायद प्यार के पथरीले रास्तों से डर गई।

वो मेरा कैसा सच्चा प्यार था जो लौटा ही नहीं, एक बार जो मुड़कर गया था वो रह गया वहीं। कहकर गया कि उसके लौट आने तक यहीं रहूँ, इंतज़ार की घड़ी ख़त्म न हुई मगर किससे कहूँ।

कोई रूठ जाता तो उसकी शिकायत करता दूर, कोई मुझे आँसू देता मैं उसके चेहरे पे लाता नूर। किसी के लिए जी जाऊँ तो किसी के लिए मरूँ, अब ईश्वर ही बता दे इससे ज़्यादा मैं क्या करूँ।

सबकी खुशी की ख़ातिर मैंने ये सारी उम्र गँवाई, फिर भी मैंने ज़िंदगी में कोई भी खुशी नहीं पाई। कोई पूछे कि मैंने क्या पाया क्या है मेरी कमाई, अधूरापन, अकेलापन और है चुप सी ये तन्हाई।

नीचा वही दिखाता है, जिसमें अहँकार होता है। ऊँचा वही उठाता है, जिसमें सँस्कार होता है।

कुछ लोगों की फ़ितरत देखकर, अब किसी की सोहबत अच्छी नहीं लगती। लफ़्ज़ों का तल्ख़ अंदाज़ सुनकर, अब किसी की मोहब्बत अच्छी नहीं लगती।

इंसान घमंड करता है, तक़दीर बदल जाती है। आईना वही रहता है, तस्वीर बदल जाती है।

भरोसा ख़ुद पर रखो, तो ताक़त बन जाता है। भरोसा दूसरों पर रखो, तो कमज़ोरी बन जाता है।


Feed

Library

Write

Notification
Profile