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आशिकों को उसने बारी बारी घर पर अपने बुलाया हैं लगा जैसे रमज़ान का रोज़ा उसने एक एक कर सबसे खुलवाया हैं ॥
ये जो आई ने के पार हैं वो कौन है मैं बोलता हूं वो खड़ा मौन है मिल्कियत का दावा है और रिश्ते पसंद करता योन है ये मैं नहीं तो मेरी जगह खड़ा कौन है #अंकित
शमशानो मैं मुर्दे जलते हुए चिंख पुकारते हैं जिनके घर वाले चले जाते हैं दुख बस वही जान ते हैं #कोरोना तू ने कितने घर हैं उजाड़े नीचे हम या ऊपर यम जान ते हैं