दोस्ती ना सही दुश्मनी ही स्वीकार करो कृष्णा ना सही कर्ण सा ही व्यवहार करो
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जब भी कभी मैं परेशान होता हूं मां के आंचल तले आराम करता हूं पल में दुख दर्द मुझसे दूर जाती है जब मां मुझको गले से लगाती हैं