Sheetal Jain
Literary Colonel
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ଅନୁସରଣକାରୀ
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ଅନୁସରଣ କରୁଛନ୍ତି

मैं एक अध्यापिका हूँ कॉलेज और स्कूल में कुछ साल सेवा देने के बाद अब घर से ही यह कार्य कर रही हूँ लेकिन लेखन में मुझे शुरू से ही रुचि रही है लेकिन कभी कुछ प्रकाशित करने का नहीं सोचा जब स्टोरी मिरर पर मैंने लोगों को पढ़ा तो यह इच्छा हुई मैं भी रचनाएँ भेजूँ इसके लिए मैं आपकी आभारी हूँ ॥

ବନ୍ଧୁମାନଙ୍କ ସହ ବାଣ୍ଟନ୍ତୁ

“वो मेरे शहर में दस्तक देते हैं फ़िज़ा में जब तक ख़ुशबू फैले चल देते हैं “ शीतल

किताब और मेरा साथ जैसे दिया और बाती ॥

“इस धरा के तुम अनमोल रतन कर लो कुछ काम ऐसा जग में हो जाओ रोशन”

रंज यह नहीं वो हमें समझते नहीं गफ़लत तो यह है वो चाहते ही नहीं “

“अगर हम अपनी व्यथा कहे तो वह एक कथा बन जाए”

फुसफुसाकर वह कितना कुछ कह गया हम कुछ कहते तब तक वह निकल गया ॥

पड़ोसी हो तो दिल गुलज़ार है बिना उनके अधूरा संसार है ॥

शांति रहती हैं वहीं जहां प्यार से रहते सभी

शून्य से शुरू सफ़र हों अमरता पर ख़त्म वहीं अनंतकाल हैं ॥💕


ଫିଡ଼୍

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