बंद किताबों में छुपा क्या है? चंचल निगाहों की बात पहचानता कौन है? ख़ामोशी टूट के पन्नों पर बिखर के कुछ तो कहेगी सुनने के लिए कौन बेताब हैं?
पलाश पलाश खिलता बन में रंग लाल मन में डाल डाल पर बसंत आया फूल फूल पर मन लहराय हसीन चित्र वादीयों का रूप निखरता पलाश का कवि अनिल