इतिहास की गहराई, जज्बातों का समंदर और मासूम कहानियों का संगम—मैं सुखविंदर, अपनी कलम से हर दिल तक पहुँचने का एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूँ।
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सोचा था आज अपनी डायरी में दुनिया की कोई नई कहानी लिखूंगा, पर मेरे ख्यालों की पूरी कायनात तो बस तुम ही हो... नतीजा ये हुआ कि मेरी ही कलम ने मुझसे बगावत कर दी, और हर एक पन्ना सिर्फ तुम्हारी मुस्कान और तुम्हारे नखरों के नाम कर दिया!
कहते हैं मैं पन्नों पर सिर्फ स्याही बिखेरता हूँ, पर हकीकत तो ये है कि मैं अपना दिल निकालकर रख देता हूँ... ताकि जब भी तुम्हारी नज़र इन लफ़्ज़ों पर पड़े, तुम्हें इनमें छुपी मेरी हर धड़कन महसूस हो सके।"
तुम हकीकत में मेरे पास नहीं तो क्या हुआ... मेरी ख्यालों की दुनिया में, तुमसे करीब कोई और नहीं। नेक्स्ट
"हज़ार चेहरों के बीच, ये दिल सिर्फ़ तुम्हारी ही रूह में सुकून ढूँढता है। तुम वह मुकम्मल दुआ हो, जिसे मैंने बिन मांगे पा लिया।"