1979 से निरंतर लेखन में संलग्न। अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित। लगभग सभी विधाओं में लेखन और सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।
Share with friendsबहुत-सी बातें मन मुताबिक नहीं होतीं लेकिन बचपन इस सोच को स्वीकार नहीं करता और चाहता है-- हर चीज़ उसकी मर्ज़ी, मन मुताबिक, उसके इशारों पर चले, दौड़े, रुके, मिले।
लेखक सृजनकर्ता नहीं है। कायनात में सृजनकर्ता केवल एक ही है - ईश्वर। लेखक उस के द्वारा सृजित चरित्रों, व्यवहारों को सिर्फ़ लिपिबद्ध करता है।