Kajal Mehtani
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मैं मूलतः प्रेम लिखती हूँ क्यूंकि ईश्वर ने मुझे प्रेम से ही नवाजा है !

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कोई भी अंधेरा हमें लील नहीं सकता.....तब तक ....जब तक प्रेम की एक भी किरन बाकी हो भीतर

कुछ एक स्त्रियों को छोड़कर प्रत्येक स्त्री ने रोटी और सपनों को एक साथ जलाया है


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