वास्तविकता को जितनी जल्दी हो सके स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योंकि इसे स्वीकार करने में जितनी देर होगी तकलीफ भी उतनी ज्यादा बढ़ेगी, इसीलिए बात चाहे स्वयं की हो या गैर की इस मामले में आंख और दिमाग पूरी तरह खुला रखें।
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विचारों को बदलने के बजाय उस जड़ पर कार्य करो जहां से विचारों को पोषण मिल रहा है, क्योंकि डाल को काटने से उस पर पुनः नई कोपले निकलना संभव है लेकिन एक बार जड़ को काट दिया जाए तो पेड़ दोबारा नहीं पनपता।
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