deepshikha divakar
Literary Colonel
35
लेखन
5
फोल्लोवेर्स
0
फॉलोविंग

None

मित्रांशी सामायिक करा
Earned badges
See all

किसी का वक्त नहीं गुजर रहा कोई वक्त के साथ गुजर गया

ये कमबख्त गुस्ताखियां भी सिलसिले वार है इन्हीं से बढ़ता अपना प्यार हैं

सपने लिखने बेठू तो अल्फ़ाज़ ही लडख़ड़ाते हैं लिखने से क्या होगा कुछ इस कदर चिड़ाते हैं दीपशिखा

कुछ सपने सोने नहीं देते हमे दुनिया में खोने नहीं देते उन्हें पाने को प्रेरित करते बूंद बूंद मेहनत से ये भरते

तनहाइयां यादें ढूंढ लाती हैं फिर तबीयत से हमे रुलाती हैं

ईश्वर को पाना है तो अहम को त्यागो अहम को पाना है तो ईश्वर को त्यागो त्याग ओर समर्पण ही जीवन का नाम है इसके बिना जीवन गुमनाम है

ईश्वर को पाना है तो अहम को त्यागो अहम को पाना है तो ईश्वर को त्यागो त्याग ओर समर्पण ही जीवन का नाम है इसके बिना जीवन गुमनाम है

जिसे चाहा उसे पाया पर उसने कितना चाहा ये ना समझ पाया


फीड

लाइब्रेरी

लिहा

सूचना
प्रोफाइल