इश्क का क्या है, वो तो राजा को भी फकीर बना दे | किसी की आँखों का अक्ष बन जाए किसी को किस्मत वाले हाथों की लकीर बना दे |
प्यार की गलियों में किस्मत आजमाने का मोका मिला, तुझे पाने की चाह किसे थी हम तो बस ये सोच के खुश के एक दफा तुझे चाहने का मौका मिला |
जब भी तुझे देखती हूँ, हर दफा शर्म में झुक जाती मेरी नज़र क्यों है? मेरा तो रोम रोम काप जाता है, तुझसे मिलने पर फिर तू इतना बेखबर क्यों है?